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Deutsch · गीत

भालू सर्दियों में क्यों सोता है? | बच्चों का ज्ञानवर्धक गीत

◷ 3:17

यह मधुर गीत बताता है कि भालू पतझड़ में खूब खाकर ऊर्जा जमा करता है और भोजन कम मिलने पर मांद में आराम करता है। बच्चे जानेंगे कि जमा चर्बी बसंत आने तक उसके शरीर को ऊर्जा देती है।

इस रिकॉर्डिंग के उपशीर्षकों से लिया गया पाठ।

गीत के बोल
Warum frisst der Bär im Herbst so viel? Er sammelt Beeren, Samen, was er findet Rote, goldene Blätter wirbeln dort Mit jedem Bissen wächst sein Fettvorrat Das Fett bewahrt Energie für später Schnee fällt, und die Sträucher werden leer Langes Suchen würde sehr viel Kraft kosten Wenn im Winter Futter schwer zu finden ist Schläft der Bär und spart Energie Er ruht, und der Winter zieht vorbei Der Fettvorrat hält seinen Körper in Gang Unter Wurzeln schützt ihn seine Höhle Der Bär rollt sich ein und regt sich wenig Langsam hebt sich seine Flanke beim Atmen Aus dem Fett gewinnt sein Körper Energie So spart er Kraft, bis Nahrung wieder da ist Wenn im Winter Futter schwer zu finden ist Schläft der Bär und spart Energie Er ruht, und der Winter zieht vorbei Der Fettvorrat hält seinen Körper in Gang Frühlingssonne taut den Schnee zu Tropfen Nun ist Nahrung leichter aufzuspüren Aus der Höhle tritt der Bär ins Licht Wenn im Winter Futter schwer zu finden ist Schläft der Bär und spart Energie Er ruht, und der Winter zieht vorbei Der Fettvorrat hält seinen Körper in Gang Winterschlaf half, als die Nahrung knapp war Nun ist Futter da; der Bär zieht wieder los
इस भाषा के संस्करण के बोल
पतझड़ में भालू की कैसी दावत? जामुन, बीज, जो मिलता, सब खाता लाल-सुनहरे पत्ते ऊपर नाचें हर कौर से चर्बी जमा होती है उसमें ऊर्जा बाद के लिए बचती बर्फ़ गिरे, झाड़ियाँ खाली हो जाएँ दूर खाने की खोज में ताकत लगती सर्दी में जब खाना मुश्किल से मिलता भालू सोकर ऊर्जा बचाता है आराम से सर्दी गुजर जाती चर्बी उसके तन को ऊर्जा देती जड़ों के नीचे मांद उसे बचाती भालू सिमटे, बहुत कम हिलता है उसका पहलू धीरे उठता-गिरता चर्बी से उसे ऊर्जा मिलती है भोजन लौटे, तब तक ताकत बचती सर्दी में जब खाना मुश्किल से मिलता भालू सोकर ऊर्जा बचाता है आराम से सर्दी गुजर जाती चर्बी उसके तन को ऊर्जा देती बसंत की धूप में बर्फ़ पिघलती अब खाना फिर आसानी से मिलता भालू मांद से रोशनी में आता सर्दी में जब खाना मुश्किल से मिलता भालू सोकर ऊर्जा बचाता है आराम से सर्दी गुजर जाती चर्बी उसके तन को ऊर्जा देती कम भोजन में नींद ने उसका साथ दिया अब खाना लौटा, वह फिर चल पड़ा
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रिकॉर्डिंग की भाषा: हिन्दीगीत

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