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Français · गीत

भालू सर्दियों में क्यों सोता है? | बच्चों का ज्ञानवर्धक गीत

◷ 3:35

यह मधुर गीत बताता है कि भालू पतझड़ में खूब खाकर ऊर्जा जमा करता है और भोजन कम मिलने पर मांद में आराम करता है। बच्चे जानेंगे कि जमा चर्बी बसंत आने तक उसके शरीर को ऊर्जा देती है।

इस रिकॉर्डिंग के उपशीर्षकों से लिया गया पाठ।

गीत के बोल
Pourquoi l'ours mange tant en automne ? Il mange des baies, des graines qu'il trouve Les feuilles rouges et dorées tournoient Chaque bouchée augmente sa réserve La graisse garde l'énergie pour plus tard La neige tombe, les buissons sont vides Chercher au loin lui prendrait trop de forces Quand la nourriture est rare en hiver L'ours dort et garde son énergie Il se repose, l'hiver suit son cours Sa graisse soutient alors son corps Sous les racines, sa tanière l'abrite L'ours s'y blottit et bouge très peu Son flanc monte au rythme d'un souffle lent Sa graisse lui fournit de l'énergie Il garde ses forces jusqu'à ce qu'elle revienne Quand la nourriture est rare en hiver L'ours dort et garde son énergie Il se repose, l'hiver suit son cours Sa graisse soutient alors son corps Le soleil printanier fait fondre la neige Il trouve à manger bien plus facilement L'ours quitte sa tanière et va vers la lumière Quand la nourriture est rare en hiver L'ours dort et garde son énergie Il se repose, l'hiver suit son cours Sa graisse soutient alors son corps Son sommeil l'a aidé quand la nourriture était rare À présent, il trouve à manger et repart
इस भाषा के संस्करण के बोल
पतझड़ में भालू की कैसी दावत? जामुन, बीज, जो मिलता, सब खाता लाल-सुनहरे पत्ते ऊपर नाचें हर कौर से चर्बी जमा होती है उसमें ऊर्जा बाद के लिए बचती बर्फ़ गिरे, झाड़ियाँ खाली हो जाएँ दूर खाने की खोज में ताकत लगती सर्दी में जब खाना मुश्किल से मिलता भालू सोकर ऊर्जा बचाता है आराम से सर्दी गुजर जाती चर्बी उसके तन को ऊर्जा देती जड़ों के नीचे मांद उसे बचाती भालू सिमटे, बहुत कम हिलता है उसका पहलू धीरे उठता-गिरता चर्बी से उसे ऊर्जा मिलती है भोजन लौटे, तब तक ताकत बचती सर्दी में जब खाना मुश्किल से मिलता भालू सोकर ऊर्जा बचाता है आराम से सर्दी गुजर जाती चर्बी उसके तन को ऊर्जा देती बसंत की धूप में बर्फ़ पिघलती अब खाना फिर आसानी से मिलता भालू मांद से रोशनी में आता सर्दी में जब खाना मुश्किल से मिलता भालू सोकर ऊर्जा बचाता है आराम से सर्दी गुजर जाती चर्बी उसके तन को ऊर्जा देती कम भोजन में नींद ने उसका साथ दिया अब खाना लौटा, वह फिर चल पड़ा
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3:33
रिकॉर्डिंग की भाषा: हिन्दीगीत

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