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English · गीत

भालू सर्दियों में क्यों सोता है? | बच्चों का ज्ञानवर्धक गीत

◷ 3:34

यह मधुर गीत बताता है कि भालू पतझड़ में खूब खाकर ऊर्जा जमा करता है और भोजन कम मिलने पर मांद में आराम करता है। बच्चे जानेंगे कि जमा चर्बी बसंत आने तक उसके शरीर को ऊर्जा देती है।

इस रिकॉर्डिंग के उपशीर्षकों से लिया गया पाठ।

गीत के बोल
Why such a feast beneath the autumn leaves? The bear eats berries, seeds, and what it finds Red and golden leaves whirl overhead Each bite builds up a useful reserve Stored fat holds energy for later Snow falls; now berry bushes stand empty Searching far would use too much strength When winter food is hard to find The bear sleeps, saving energy It rests while winter passes by Stored fat keeps its body going A den beneath the roots keeps it sheltered The bear curls up and moves very little Its side rises slowly with each breath From stored fat, it draws the energy it needs It saves its strength until food returns When winter food is hard to find The bear sleeps, saving energy It rests while winter passes by Stored fat keeps its body going Spring sunlight melts the snow to shining drops Now something to eat is easy to find The bear steps from its den into the light When winter food is hard to find The bear sleeps, saving energy It rests while winter passes by Stored fat keeps its body going Winter sleep helped through the season of need Now food is back; the bear sets out again
इस भाषा के संस्करण के बोल
पतझड़ में भालू की कैसी दावत? जामुन, बीज, जो मिलता, सब खाता लाल-सुनहरे पत्ते ऊपर नाचें हर कौर से चर्बी जमा होती है उसमें ऊर्जा बाद के लिए बचती बर्फ़ गिरे, झाड़ियाँ खाली हो जाएँ दूर खाने की खोज में ताकत लगती सर्दी में जब खाना मुश्किल से मिलता भालू सोकर ऊर्जा बचाता है आराम से सर्दी गुजर जाती चर्बी उसके तन को ऊर्जा देती जड़ों के नीचे मांद उसे बचाती भालू सिमटे, बहुत कम हिलता है उसका पहलू धीरे उठता-गिरता चर्बी से उसे ऊर्जा मिलती है भोजन लौटे, तब तक ताकत बचती सर्दी में जब खाना मुश्किल से मिलता भालू सोकर ऊर्जा बचाता है आराम से सर्दी गुजर जाती चर्बी उसके तन को ऊर्जा देती बसंत की धूप में बर्फ़ पिघलती अब खाना फिर आसानी से मिलता भालू मांद से रोशनी में आता सर्दी में जब खाना मुश्किल से मिलता भालू सोकर ऊर्जा बचाता है आराम से सर्दी गुजर जाती चर्बी उसके तन को ऊर्जा देती कम भोजन में नींद ने उसका साथ दिया अब खाना लौटा, वह फिर चल पड़ा
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3:33
रिकॉर्डिंग की भाषा: हिन्दीगीत

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3:12
रिकॉर्डिंग की भाषा: हिन्दीगीत

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रिकॉर्डिंग की भाषा: हिन्दीगीत

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