गीत के बोल
दोपहर में दौड़ी छाया कैसी?
सूरज धरती पर उजियारा भेजे।
पास का चाँद सामने से गुज़रे।
पर दूर के सूरज को छूता नहीं।
तीनों साथी एक सीध में आते।
चाँद सूरज और धरती के बीच आए।
सूरज बड़ा, चाँद पास—एक से दिखते।
सूरज, चाँद, धरती—एक सीध में।
चाँद रोशनी रोके, सूरज फिर भी चमके।
उसकी छोटी छाया धरती पर दौड़े।
यही सूर्यग्रहण कहलाता है।
चाँद की छोटी छाया धरती पर दौड़े।
वह बस छोटे भूभाग पर पड़ती है।
चाँद और छाया आगे बढ़ जाते।
सूरज का पूरा गोला फिर दिखता।
पूरी धूप धरती पर लौट आती।
सूरज, चाँद, धरती—एक सीध में।
चाँद रोशनी रोके, सूरज फिर भी चमके।
उसकी छोटी छाया धरती पर दौड़े।
यही सूर्यग्रहण कहलाता है।
आंशिक ग्रहण सूरज का कुछ भाग ढकता है।
पूर्ण ग्रहण पल भर पूरा गोला ढकता है।
हर अमावस पर नहीं; कक्षा थोड़ी झुकी है।
सौर फ़िल्टर वाला खास चश्मा पहनो।
बिना सुरक्षा सूरज को मत देखो।
साधारण धूप का चश्मा नहीं बचाता।
सूरज, चाँद, धरती—एक सीध में।
चाँद रोशनी रोके, सूरज फिर भी चमके।
उसकी छोटी छाया धरती पर दौड़े।
यही सूर्यग्रहण कहलाता है।