गीत के बोल
चुप बैठूँ तो क्या धक-धक करता है?
सीने के बीच में हाथ रखता हूँ
थोड़ा बाईं ओर धड़कन मिलती है
हथेली पर धक-धक फिर आती है
दिल एक पेशी है, जो काम करती है
दो उँगलियों से कलाई हल्के छूता हूँ
हर धड़कन नब्ज़ की लहर उठाती है
धक-धक, दिल खून पंप करता है
सिकुड़ता, ढीला होता, फिर भरता है
फेफड़ों में खून ऑक्सीजन लेता है
फिर उसे पाँव से सिर तक पहुँचाता है
मैं कुछ हल्की छलाँगें लगाता हूँ
मेरे गाल गुलाबी हो जाते हैं
फिर सीना, फिर कलाई छूता हूँ
अब हर धक-धक पहले से तेज़ है
पेशियों को अब ज्यादा ऑक्सीजन चाहिए
धक-धक, दिल खून पंप करता है
सिकुड़ता, ढीला होता, फिर भरता है
फेफड़ों में खून ऑक्सीजन लेता है
फिर उसे पाँव से सिर तक पहुँचाता है
सोफ़े पर बैठकर आराम करता हूँ
कुछ देर में नब्ज़ धीमी होती है
नरम लय फिर शांत हो जाती है
धक-धक, दिल खून पंप करता है
सिकुड़ता, ढीला होता, फिर भरता है
फेफड़ों में खून ऑक्सीजन लेता है
फिर उसे पाँव से सिर तक पहुँचाता है
आराम के बाद नब्ज़ धीमी है
दिल पंप जैसा काम करता है